Punjabi Poetry
 View Forum
 Create New Topic
 Search in Forums
  Home > Communities > Punjabi Poetry > Forum > messages
ਗੁਰਦਰਸ਼ਨ ਮਾਨ
ਗੁਰਦਰਸ਼ਨ
Posts: 753
Gender: Male
Joined: 13/Jun/2016
Location: _________
View All Topics by ਗੁਰਦਰਸ਼ਨ
View All Posts by ਗੁਰਦਰਸ਼ਨ
 
हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये
हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये
अपनी कुरसी के लिए जज़्बात को मत छेड़िये

हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िये

ग़र ग़लतियाँ बाबर की थीं; जुम्मन का घर फिर क्यों जले
ऐसे नाज़ुक वक़्त में हालात को मत छेड़िये

हैं कहाँ हिटलर, हलाकू, ज़ार या चंगेज़ ख़ाँ
मिट गये सब, क़ौम की औक़ात को मत छेड़िये

छेड़िये इक जंग, मिल-जुल कर गरीबी के ख़िलाफ़
दोस्त, मेरे मजहबी नग़मात को मत छेड़िये

- अदम गोंडवी
18 Apr 2018

Reply