अब याद दिलाये कौन तुम्हें, ये साल भी आखिर बीत गया. वो सर्द हवाएं अब भी हैं, रंगीन फिजाएं अब भी हैं..... वो भीगी भीगी पानी की, पुर ज़ोर सदाएं अब भी हैं... मैं अब भी उधर को जाती हूँ, जब तुम नही होते साथ मेरे.. होते हैं खाली हाथ मेरे, पुर ज़ोर हवाएं पूछती हैं.. वो सर्द हवाएं पूछती हैं,, वो कहाँ गया दोस्त तेरा.. वो कहाँ गया है मीत तेरा . या फिर ये ज़माना जीत गया...
her ek baat pe kehte ho tum k tu kia hai, tumhi kaho k ye andaaz-e-guftugoo kia hai... jalaa hai jism jahan, dil bhi jal gaya hoga, kureydte ho jo ab raakh, justujoo kya hai!?! rgon mein dourrte phirne k hum nahi qayel, jo aankh hi se na tapka to phir lahoo kya hai.. galib sahib